अर्थव्यवस्था धीमी जरूर पर बेहतर ( Indian Economy slow but better )

पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं समेत कई संस्थाओं एवं व्यक्तियों द्वारा अर्थव्यवस्था में सुस्ती और धीमेपन पर चिंता व्यक्त की जा रही है। दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था की विकास दर में कमी के कारण चिंता होना स्वाभाविक ही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह अर्थव्यवस्था में मंदी की ओर इंगित करती हैं या फिर यह धीमापन अल्पकालिक ही है। इस संदर्भ में दो प्रकार के परस्पर विरोधी बयान आते रहे हैं। एक ओर लोगों का कहना है कि अर्थव्यवस्था में मंदी आ गई है या आने का शुरुआती संकेत है। वे इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय वित्त संस्थाओं जैसेअंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ), विश्व बैंक और मूडीज सरीखी रेटिंग एजेंसियों का हवाला देते हैं।

गौरतलब है कि आइएमएफ द्वारा 2019-20में विकास की संभावनाओं को घटाकर 6.1 प्रतिशत कर दिया है। वहीं विश्व बैंक ने भी इसे 6.0 प्रतिशत पर आंका है। उधर मूडीज नाम की । अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी ने भारत की साख रेटिंग को 'स्थिर' से घटाकर नकारात्मक' कर दिया है और उसके बाद एजेंसी ने वर्ष 2019 के लिए आर्थिक विकास की संभावनाओं को अपने । पूर्व के 5.8 प्रतिशत के लक्ष्य को घटाकर 5.6 । प्रतिशत कर दिया है। दूसरी ओर, सरकार समेत कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आर्थिक विकास में मात्र कुछ धीमापन आया है पर मंदी । की कोई आशंका नहीं है। संसद के शीतकालीन । सत्र की शुरुआत में ही वित्तमंत्री ने अपने बयान । में कहा कि हाल में आर्थिक विकास में आए छले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं समेत कई संस्थाओं एवं व्यक्तियों द्वारा अर्थव्यवस्था ( Economy ) में सुस्ती और धीमेपन पर चिंता व्यक्त की जा रही है। दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था की विकास दर में कमी के कारण चिंता होना स्वाभाविक ही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह अर्थव्यवस्था ( Economy ) में मंदी की ओर इंगित करती हैं या फिर यह धीमापन अल्पकालिक ही है। इस संदर्भ में दो प्रकार के परस्पर विरोधी बयान आते रहे हैं। एक ओर लोगों का कहना है कि अर्थव्यवस्था में मंदी आ गई है या आने का शुरुआती संकेत है। वे इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय वित्त संस्थाओं जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ), विश्व बैंक और मूडीज सरीखी रेटिंग एजेंसियों का हवाला देते हैं।

गौरतलब है कि आइएमएफ द्वारा 2019-20 में विकास की संभावनाओं को घटाकर 6.1 प्रतिशत कर दिया है। वहीं विश्व बैंक ने भी इसे 6.0 प्रतिशत पर आंका है। उधर मूडीज नाम की । अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी ने भारत की साख रेटिंग को 'स्थिर' से घटाकर नकारात्मक' कर दिया है और उसके बाद एजेंसी ने वर्ष 2019 के लिए आर्थिक विकास की संभावनाओं को अपने । पूर्व के 5.8 प्रतिशत के लक्ष्य को घटाकर 5.6 । प्रतिशत कर दिया है। दूसरी ओर, सरकार समेत कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आर्थिक( Economy ) विकास में मात्र कुछ धीमापन आया है पर मंदी । की कोई आशंका नहीं है।
शुरू की, लेकिन इसमें सफल नहीं हो पाया। उसी दौरान जयपुर के कई साथी मुम्बई में अपना मुकाम बनाने निकल रहे थे,

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