आखिर कब खत्म होगी दुनिया

आखिर कब खत्म होगी दुनिया

वेदों के अनुसार यह सृष्टि 1000 चतुर्युगी तक चलती है 6 चतुर्युगी इस सृष्टि के बनने मैं लगती है तथा 6चतुर्युगी ही इस सृष्टि के प्रलय में लग जाती है तो बची 994 चतुर्युगी मैं सृष्टि चलती है एक  चतुर्युगी में चार युग होते हैं
सतयुग
कलयुग
द्वापर युग
त्रेता युग
यह युग  निम्न वर्षों के होते हैं
सतयुग:- 1728000 वर्ष
त्रेता युग:- 1296000 वर्ष
द्वापर में:- 874000 वर्ष 
कलयुग:- 432000 वर्ष
चारों युगों को मिलाकर 4320000 वर्ष होते हैं यह वर्ष 1
 चतुर्युगी के होते हैं ऐसी ही 994 
 चतुर्युगी मनुष्य के जीवन की होती है
अगर आज की बात करें हम तो हम 453 चतुर्युगी जीत चुके हैं तथा वर्तमान समय में 454 वी चतुर्युगी का कलयुग युग चल रहा है
गुजर चुकी चतुर्युगी वर्षों में देखें तो एक अरब 95 करोड 69 लाख  60000 वर्ष बीत चुके हैं
तथा इसके साथ ही 454 वि  चतुर्युगी का सतयुग गुजर चुका है त्रेता युग गुजर चुका है तथा द्वापर युग भी गुजर चुका है वर्तमान समय में कलयुग चल रहा है तथा कलयुग के भी 5118 वर्ष के लगभग गुजर चुके हैं इसके अनुसार मनुष्य की उत्पत्ति के एक अरब 96 करोड़ 8लाख 53 हजार 119 वां वर्ष अभी चल रहा है यहां पर प्रश्न यह है कि क्या पृथ्वी का विनाश हो जाएगा यह मनुष्य का जीवन इसी प्रकार चलता रहेगा
तो अभी तो बहुत ही लंबे समय तक जाना है अभी तो 454 वि  चतुर्युगी चल रही है जो कि 994  तक जाएगी  इस प्रकार के प्रश्न के बनने का प्रमुख कारण है दुनिया के जितने भी देश हैं सब देशों ने खतरनाक हथियार इकट्ठे कर लिए हैं जिससे विश्व युद्ध होने का खतरा है तथा साथ ही पृथ्वी के विनाश होने की संभावना है इसके साथ ही वातावरण में प्रदूषण की मात्रा अधिक होना भी मनुष्य के लिए खतरा उत्पन्न करती है प्रदूषण के बढ़ जाने से कोई भी भयानक आपदा आ सकती है लोग सोचते हैं कि सृष्टि नष्ट हो जाएगी परंतु ऐसा बिल्कुल भी नहीं है
पृथ्वी पर विश्व युद्ध हो जाए इससे 2-4 या 10-20 राष्ट्र समाप्त हो जाए परंतु सृष्टि इतनी आसानी से समाप्त नहीं होने वाली है
आज का युग विज्ञान का युग है यह कोई पहली बार नहीं है की टेक्नोलॉजी इतने उच्च स्तर पर आई है
श्री राम ने इसी  चतुर्युगी के त्रेता और द्वापर युग के मध्य जन्म लिया था आज से लगभग 900000 साल पहले रामायण हुई थी उस समय श्री राम के पास ऐसे अस्त्र-शस्त्र थे कि खर और दूषण की 10000 की सेना का सर्वनाश कर दिया था उस समय के विमान शास्त्र भी इतने उन्नत थे की दिखाई भी नहीं देते थे अर्थात उन पर पढ़ने वाली लाइट रिफ्लेक्ट नहीं होती थी आज नासा भी इसी ओर बढ़ रहा है
हम बात करें आज से 500- 1000 वर्ष पूर्व की तो उस समय इतनी उन्नत साइंस टेक्नोलॉजी नहीं थी जब 500-1000 वर्ष में टेक्नोलॉजी इतनी उन्नत हो सकती है तो आजएक अरब 96 करोड़ 8लाख 53 हजार 119 वां वर्ष चल रहा है इतने वर्षों में कितनी ही बार टेक्नोलॉजी इस से ऊपर विकसित हुई होगी
यह संसार इसी प्रकार चलता रहेगा क्योंकि वेद का ज्ञान इस संसार के पास हमेशा रहेगा चाहे वह पुस्तक के रूप में हो या फिर श्रुति के रूप में हो वेद का ज्ञान निरंतर रूप से चला आ रहा है तथा इसी प्रकार 2 अरब 33 करोड़ वर्ष तक यह सृष्टि इसी प्रकार चलती रहेगी इन वर्षों के दौरान कई नई सभ्यताएं बनेगी बिगड़ेगी उन्नत होगी उन्नत होगी कई लड़ाई होगी तथा भौगोलिक परिस्थितियां भी बदलेगी परंतु सृष्टि निर्बाध रूप से चलती रहेगी

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