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दुनिया का सबसे बड़ा जहाज

मनुष्य की चाहत की कोई सीमा नहीं होती है पृथ्वी पर एक से बढ़कर एक चमत्कारी रचनाएं कर चुका मनुष्य जो अब तक अंतरिक्ष तक अपने कदम बढ़ा चुका है फिर वह चाहे चंद्रमा पर जाने के बात हो या अंतरिक्ष मैं स्टेशन बनाकर अंतरिक्ष के अध्ययन करने की बात हो इसके साथ ही धरती पर सागर या महासागर ऐसी जगह है जो मनुष्य को स्वयं की ओर निरंतर आकर्षित करता है समुद्र में उत्पन्न लहरों को अपने काबू में करने तथा उस पर अपने अरमानों के रंगों को बिखेरने की कोशिश मनुष्य निरंतर कर रहा है इसी कोशिश में मनुष्य को मिली एक सफलता यह है सिंफनी ऑफ द सीज नामक जहाज

विश्व में उपस्थित सभी जहाजो से बड़ा क्रूज़  का जहाज जिसकी शुरुआत अमेरिका में हुई है अमेरिका के मियामी नामक स्थान पर इस भारी-भरकम जहाज को तैयार किया गया है इस नवीनतम यात्री जहाज का निर्माण करने में लागत 1•35 बिलियन डॉलर है
इसमें अट्ठारह डेक 22 रेसंत्रा पता 6600 व्यक्तियों को रखने के लिए कमरे उपलब्ध है इसके साथ ही इसकी ऊंचाई लगभग 238 फीट ऊंची तथा इसकी लंबाई 1188 फिट है इसे सर्वप्रथम मियामी बंदरगाह के टर्मिनल ए पर रात्रि को उतारा गया जिसमें इसमें चमकदार प्रकाश का महत्वपूर्ण प्रदर्शन किया गया

 प्रत्येक स्थिति मैं यह जहाज खास है

यह जहाज दुनिया का सबसे बड़ा जहाज है यह पिछले वर्ष 31 मार्च को लांच हुआ था तथा 7 अप्रैल को इसमें पहली यात्रा शुरू की यह इतना बड़ा और विशाल है इसको दूर से देखने पर समुद्र में एक चलता फिरता शहर दिखाई देता है इस जहाज में तकरीबन 8000 लोग आराम से यात्रा कर सकते हैं इस जहाज का कुल वजन 228081 टन है तथा यह 10 मंजिला ऊंचा है
वजन के लिहाज से पृथ्वी पर उपस्थित  सभी जहाजों से यह जहाज भारी है

इससे पहले समुद्र पर राज करने के लिए टाइटेनिक नामक जहाज आज से करीब 108 साल पहले यात्रियों को लेकर समुद्र में निकला था मगर रात्रि में न्यूयॉर्क ओर बढ़ते हुए रात्रि में एक बहुत बड़ी बर्फ की  चट्टान से टकरा गया जिससे उसमें उपस्थित यात्रियों में से कुछ ही यात्री जिंदा बच पाए तथा बाकी यात्री टाइटैनिक के साथी समुद्र में डूब गए तथा अगले दिन का सूरज भी नहीं देख पाये
टाइटेनिक को बनाने वालों का दावा था कि यह जहाज कभी नहीं डूबेगा मगर उसकी किस्मत देखिए वह अपनी पहली यात्रा भी पूरी नहीं कर पाया था तथा रास्ते में ही बर्फ की चट्टान से टकराकर डूब गया यह उस वक्त विश्व का सबसे बड़ा जहाज था

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