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आखिर क्यों पिछले 46 वर्षों में कोई इंसान चंद्रमा पर नही गया???

आखिर क्यों पिछले 46 वर्षों में कोई इंसान चंद्रमा पर नही गया???


मानव को चांद सदियों पूर्व से ही अपनी ओर आकर्षित करता आ रहा है मनुष्य चांद पर जाने के सपने देखते आया है इस सपने को साकार तथा स्वयं की वैज्ञानिक योग्यता को सफलतापूर्वक साबित करने के लिए ही मनुष्य चंद्रमा पर गया
शीत युद्ध के दौरान चंद्रमा पर जाने के लिए सभी में होड़ मची हुई थी
इस बात में कोई शक नहीं है किस शीत युद्ध नहीं छिड़ता तो अमेरिका चंद्रमा पर जाने के लिए इतनी जल्दबाजी नहीं दिखाता सोवियत संघ के साथ अमेरिका का भी युद्ध चल रहा था दोनों एक दूसरे से स्वयं को ताकतवर के रूप में पेश करने में लगे हुए थे उनका मकसद यह संदेश देने का था जो चांद पर पहुंच सकता है वह आसानी से धरती पर उपस्थित अपने किसी भी दुश्मन को खत्म कर सकता है
उस दौरान सोवियत संघ विज्ञान में अमेरिका से बेहतर थी वह 13 सितंबर 1959 को मानव निर्मित वस्तु को चांद पर सफलतापूर्वक पहुंचाने में सफल भी हो गया था इसके पश्चात जब सोवियत संघ को मानव को अंतरिक्ष में भेजने की कामयाबी मिली यूरो गागरिन 12 अप्रैल 1961 को अंतरिक्ष में यात्रा करने वाले पहले मनुष्य हो गए इस दौरान अमेरिका को स्वयं में अपमान महसूस हुआ इसी दौरान 25 मई को अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने मनुष्य को चांद पर भेजने में वापस लाने का अभियान चलाने का संकल्प लिया 40000 लोगों की टीम अपोलो नामक अभियान में पूरी तरह से जुट गई उन्हें पहली सफलता 16 जुलाई 1975 को मिली और 7 दिसंबर 1972 को अंतिम बार मनुष्य चांद पर उतरा
चंद्रमा पर इंसान को भेजने की कामयाबी मिलने से अमेरिका ने इससे चार बार पूरी सफलता के साथ दौरा भी दिया इससे सोवियत संघ के हौसले पस्त हो गए तथा साथ ही धरती पर लड़ी जा रही लड़ाई और तीखी हो गई
जब राष्ट्रपति बदले अमेरिका की प्राथमिकताएं भी बदल गई ऐसे अभियानों को बहुत महंगा माना गया और रोबोटिक या गैर इंसान सस्ते अभियान को मिता मिली
इस दौरान जब अमेरिका ने चंद्रमा पर मनुष्य भेजने से अपना हाथ पीछे की ओर खींचा तब तेल की समस्या तथा दुनिया में कई जगह गिरे युद्ध और उन में अमेरिका की सोने की भागीदारी तथा मूलभूत ढांचे का निर्माण एवं तकनीक के विकास पर ज्यादा ध्यान दिया गया अमेरिका का जो इस बात पर था कि वह ऐसी चीजें बनाएं जिन की जरूरत है धरती पर हर किसी को हो ताकि अमेरिका का बाजार बढ़ सकें और विकास का कार्य प्रगति पर है
दुनिया के ज्यादातर देशों ने चांद पर जाने की अपनी क्षमता के बजाय अपनी दूसरी संस्थाओं को बढ़ाया उदाहरण के लिए भारत की जान में रुचि है परंतु भारत में 31 साल पहले स्वीडन से बोफोर्स तोपे खरीदी एवं अब उसे फ्रांस से राफेल नामक विमान खरीद रहा है जिनकी चंद्रमा पर जाने मैं कोई रुचि नहीं है
इस प्रकार पृथ्वी पर उपस्थित सभी देशों मैं चंद्रमा पर इंसान भेजने से कोई विशेष फायदा नहीं मिलने पर इस मध्य नजर रखते हुए इंसान को भेजने के लिए आने वाले खर्च से बचने के लिए चंद्रमा पर इंसान भेजने के पिछले 46 वर्षों में कोई भी मिशन नहीं किया चांद पर पहुंचने के लिए दुनिया के कुल 6 देश उत्सुक है रूस भारत चीन इसराइल जापान और जर्मनी इस नए वर्ष में चंद्रमा पर पहुंचा चीन का एक जान बहुत ही चर्चा में है तथा भारत भी chandrayaan-1 के पश्चात शीघ्र ही chandrayaan-2 का प्रक्षेपण करने की भरपूर तैयारी में
भारत द्वारा भेजे गए chandrayaan-1 ने चंद्रमा पर पानी की खोज की थी अबे चंद्रमा पर आगे की खोज के लिए हमारी निगाहें chandrayaan-2 पर लगी हुई है इस अभियान के माध्यम से भारत अपनी तकनीकी योग्यता को प्रमाणित करने में सफल होगा भारत स्वयं की चंद्रमा पर सजगता से उतरने की समता को प्रदर्शित कर सकेगा भारत लैंडर तथा रोवर की मदद से यह कर सकेगा इससे भारत के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को विविध प्रकार की उपयोगी डाटा एवं आंकड़ों की अगली कड़ी प्राप्त हो सकेगी

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